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Thursday, 12 July 2012

झरने का पानी

बुद्ध जब वृद्ध हो गये थे, तब एक दोपहर एक वन में एक वृक्ष तले विश्राम को रुके थे. उन्हें प्यास लगी तो आनंद पास की पहाड़ी झरने पर पानी लेने गया था. पर झरने से अभी-अभी गाड़ियां निकली थी और उसका पानी गंदा हो गया था. कीचड़ ही कीचड़ और सड़े पत्ते उसमें उभर कर आ गये थे. आनंद उसका पानी बिना लिए लौट आया.


 उसने बुद्ध से कहा, ‘झरने का पानी निर्मल नहीं है, मैं पीछे लौट कर नदी से पानी ले आता हूं.’ नदी बहुत दूर थी. बुद्ध ने उसे झरने का पानी ही लाने को वापस लौटा दिया. 


आनंद थोड़ी देर में फिर खाली लौट आया. पानी उसे लाने जैसा नहीं लगा. पर बुद्ध ने उसे इस बार भी वापस लौटा दिया. तीसरी बार आनंद जब झरने पर पहुंचा, तो देखकर चकित हो गया. झरना अब बिलकुल निर्मल और शांत हो गया था, कीचड़ बैठ गयी थी और जल बिलकुल निर्मल हो गया था.
यही स्थिति हमारे मन की भी है. जीवन की गाड़ियां उसे विक्षुब्ध कर जाती हैं, मथ देती हैं. पर कोई यदि शांति और धीरज से उसे बैठा देखता है रहे, तो कीचड़ अपने आप नीचे बैठ जाती है और सहज निर्मलता का आगमन हो जाता है.

हजरत मोहम्मद ने दिखाया वृद्धा को सही रास्ता

हजरत मोहम्मद ने दिखाया वृद्धा को सही रास्ता
हजरत मोहम्मद जब भी नमाज पढ़ने मस्जिद जाते तो उन्हें नित्य ही एक वृद्धा के घर के सामने से निकलना पड़ता था। वह वृद्धा अशिष्ट, कर्कश और क्रोधी स्वभाव की थी। जब भी मोहम्मद साहब उधर से निकलते, वह उन पर कूड़ा-करकट फेंक दिया करती थी। मोहम्मद साहब बगैर कुछ कहे अपने कपड़ों से कूड़ा झाड़कर आगे बढ़ जाते। प्रतिदिन की तरह जब वे एक दिन उधर से गुजरे तो उन पर कूड़ा आकर नहीं गिरा। उन्हें कुछ हैरानी हुई, किंतु वे आगे बढ़ गए।

अगले दिन फिर ऐसा ही हुआ तो मोहम्मद साहब से रहा नहीं गया। उन्होंने दरवाजे पर दस्तक दी। वृद्धा ने दरवाजा खोला। दो ही दिन में बीमारी के कारण वह अत्यंत दुर्बल हो गई थी। मोहम्मद साहब उसकी बीमारी की बात सुनकर हकीम को बुलाकर लाए और उसकी दवा आदि की व्यवस्था की। उनकी सेवा और देखभाल से वृद्धा शीघ्र ही स्वस्थ हो गई।

अंतिम दिन जब वह अपने बिस्तर से उठ बैठी तो मोहम्मद साहब ने कहा- अपनी दवाएं लेती रहना और मेरी जरूरत हो तो मुझे बुला लेना। वृद्धा रोने लगी। मोहम्मद साहब ने उससे रोने का कारण पूछा तो वह बोली, मेरे र्दुव्‍यवहार के लिए मुझे माफ कर दोगे? वे हंसते हुए कहने लगे- भूल जाओ सब कुछ और अपनी तबीयत सुधारो। वृद्धा बोली- मैं क्या सुधारूंगी तबीयत? तुमने तबीयत के साथ-साथ मुझे भी सुधार दिया है। तुमने अपने प्रेम और पवित्रता से मुझे सही मार्ग दिखाया है। मैं आजीवन तुम्हारी अहसानमंद रहूंगी।

घटना का संदेश है कि जिसने स्वयं को प्रेम, क्षमा व सद्भावना में डुबोकर पवित्र कर लिया, उसने संत-महात्माओं से भी अधिक प्राप्त कर लिया।

Zindagi ki asli udaan


Zindagi ki asli udaan abhi baaki hai,
Zindagi ke kai Imtehaan abhi baaki hai,
Filhaal to naapi hai Muthi bhar zameen,
Abhi to saara Asmaan baaki hai…


Zindagi ki asli udaan abhi baaki hai,
Zindagi ke kai imtihann abhi baaki hai.
Abhi to napi hai muthi bhar zameen aapne,
Aage abhi saara aasman baaki hai.


Wo khud hi pura krta h manzil asmanon ki
Parindo ko nhi di jati talim udano ki
Rakhta h jo hausla asman chune ka
usko nhi hoti parwah zmane ki




Knowledge is not power; Implementation is power

“If you don’t have personal goals, you’re controlled by those who do.” – Garrison Wynn

“Change is an action not just an epiphany!” – Garrison Wynn

“Knowledge is not power; Implementation is power” – Garrison Wynn

“Long-term success is the result of relationships built on a foundation of trust. People get more value from those they trust.” – Garrison Wynn

“Fear is a survival tool not a handicap.” – Garrison Wynn

“The smartest people in the world are not in charge, they work for the action takers.”- Garrison Wynn

“Satisfaction may be the goal of the common man; but it is the enemy of greatness” -  Garrison Wynn

“Goals are like the gas in your car, you may go in many different directions after you fill up, but with out the gas you are not going anywhere” – Garrison Wynn
“Action and flexibility create opportunity” – Garrison Wynn
“Approach life talent first” – Garrison Wynn
“Before you can have great employees you have to put them in a position to create their own future.” –  Garrison Wynn
“You can’t lead by example if you are a bad example. If you stink at something, stop doing in front of everyone until you improve!” – Garrison Wynn
“Position yourself to succeed first by building good relationships with the right people; and then put your effort and expertise behind that!” – Garrison Wynn